माता तथा शिशु का स्‍वास्‍थ्‍य
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    "हम सभी की जरूरत है हमारे दिमाग को बदलना है हमें लोगों के दिल को एकजुट करने की आवश्यकता है। "

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माता के स्‍वास्‍थ्‍य से तात्‍पर्य महिला के गर्भावस्‍था के दौरान या प्रसूती पूर्व, प्रसूती और प्रसूती के बाद की अवधि के स्‍वास्‍थ्‍य से है।

प्रसूती पूर्व देखरेख

  • प्रसूती पूर्व देखरेख या सहायता महिला को गर्भावस्‍था के दौरान प्राप्‍त होने वाली स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख है। प्रसूती पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य को सुनिश्‍चित करने के लिए समय से प्रसूती पूर्व देखरेखप्राप्‍त करना आवश्‍यक है। प्रसमूतिपर्क देखरेख आपको तथा आपके बच्‍चे क स्‍वस्‍थ रखने के लिए आवश्‍यक है। प्रसूती पूर्व देखरेख को अत्‍यधिक आवश्‍यक मानते हुए डॉक्‍टर समय से पूर्व ही स्‍वास्‍थ्‍य माता या बच्‍चे की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को पकड़ लेते हैं।
  • यदि आपको लगे कि आप गर्भवती हैं, यथा शीघ्र संभव डॉक्‍टर से भेंट करें। यह भी सुनिश्‍चित करें कि किसी प्रकार की समस्‍या या जटिलता से बचने के लिए अपने गर्भावस्‍था की पूरी अवधि के दौरान कम से कम महिने में एक बार डॉक्‍टर से नियमित रूप से भेंट करें।
  • डॉक्‍टर प्रसूती-पूर्व देखरेख में आपके विगत रोगों, ऑपरेशनों, पारिवारिक इतिहास, वंशानुक्रम इतिहास, प्रसूति की तिथि की गणना इत्‍यादि की गहराई से समीक्षा करेगा।

 

अधिक जोखिम भरा गर्भधारण

  • अधिक जोखिम भरे गर्भधारण वह है जिसमें पूरे गर्भावस्‍था तथा शिशुपालन के दौरान माता तथा शिशु पर विशेष निगरानी तथा देखरेख शामिल हैं।
  • माता की अधिक आयु, जीवन शैली जैसे धूम्रपान तथा शराब का सेवन, मधुमेह या मिर्गी जैसी स्‍थिति और अनेक बार गर्भधारण भी माता को जोखिम भरे गर्भधारण विकसित हो सकता है।
  • यदि कोई इस बात से सचेत है कि उसे जोखिम भरा गर्भधारण हो सकता है, इससे बचाव हेतु अनेक उपाय हैं। कुछ विशेषज्ञ मार्गदर्शन के लिए जब आप गर्भधारण के बारे में सोच रहे हों, किसी डॉक्‍टर से भेंट करें।
  • अधिक जोखिम भरे गर्भधारण से बचने के लिए नियमित प्रसूति पूर्व देखरेख करवाना, स्‍वास्‍थ्‍य आहार लेना, अपने वजन पर नजर रखना तथा शराब, नशीले पदार्थ और धूम्रपान जैसी वस्‍तुओं का परहेज करना आवश्‍यक है।

 

गर्भधारण करने में असमर्थता

  • कभी-कभी महिला प्रयासों के पश्‍चात भी गर्भधारण करने में असमर्थ होती है या बार-बार गर्भपात हो जाता है। यह बांझपन की ओर इशारा करता है, जो महिला या पुरूष की शारीरिक स्‍थिति के कारण हो सकता है गर्भधारण में असमर्थता की स्‍थिति में बांझपन के कारण जानने तथा दवाइयों या उपचार द्वारा संभावित उपचार हेतु डॉक्‍टर के पास जाएं।
  • प्राकृतिक रूप से असमर्थता से यह तात्‍पर्य नहीं है कि दम्‍पत्‍ति को बच्‍चा नहीं हो सकता है। कृत्रिम रूप से गर्भधारण, दत्तक ग्रहण, धात्री देखरेख और सरोगेसी जैसे विकल्‍प दम्‍पत्‍ति के पास उपलब्‍ध हैं और उचित डॉक्‍टरों द्वारा इनकी सलाह ली जा सकती है।

 

मिसकैरिज

  • 20वें सप्‍ताह से पूर्व गर्भ का नष्‍ट हो जाना मिसकैरिज कहलाता है। अधिकतर मिसकैरिज भ्रूण के पूर्ण रूप से विकसित न हो पाने के कारण होता है।
  • इसके संकेत तथा लक्षणों में योनि से रक्‍तस्राव निचले पेट में या कमर दर्द या मरोड़ और तरल पदार्थ या मांसपेशी का प्रवाह शामिल है।
  • यदि आप इनमे से किसी भी लक्षण को देखें, तो तुरंत ही डॉक्‍टर से भेंट करें।
  • डॉक्‍टर पेल्‍विक की जांच, अल्‍ट्रासाउंड, रक्‍त परीक्षण या मांसपेशी की यह जानने के लिए जांच करवाए कि क्‍या भ्रूण को बचाया जा सकता है अथवा मिसकैरिज को रोका नहीं जा सकता है।

 

शिशु का जन्‍म

  • लेवर और प्रसव सामान्‍यतया निर्धारित पद्धति से होता है – जो सर्विक्‍स का नर्म होना तथा खुलना, एमिनोटिक थैली का फटना, खिंचाव अधिक तथा लगातार होना है।
  • तथापि, प्रसव के दौरान परिस्‍थिति तथा समस्‍या को देखते हुए विकल्‍पों को पुन: देखा जाता है, जहां आपको दर्द उठने के लिए दवाईयों या अत्‍याधिक रूप से सी-सेक्‍शन की आवश्‍यकता हो सकती है।

 

प्रसव-पश्‍चात देखरेख

  • प्रसव के बाद देखरेख में स्‍वयं के साथ-साथ बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण का रख-रखाव किया जाता है।
  • प्रसव के तुरंत बाद नई मां को मानसिक तथा शारीरिक दोनों रूप से पर्याप्‍त आराम की अत्‍यंत आवश्‍यकता है।
  • इसमें शारीरिक बदलाव जैसे कि योनि का घाव या सी-सेक्‍शन का घाव की देखरेख, सूजे हुए स्‍तन, दूध का रिसाव, पेशाब से संबंधित समस्‍याएं, कब्‍ज, पैरों तथा हाथों में सूजन तथा बालों का गिरना शामिल है।
  • प्रसव के बाद देखरेख में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को सुरक्षित तथा बनाए रखना शामिल है।
  • अत: प्रसव के बाद देखरेख में आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और मिजाज, चिड़चिड़ापन, दुख तथा उत्‍सुकता की देखरेख शामिल है।
    • प्रसवोत्‍तर अवसादप्रसव के पश्‍चात एक माह के भीतर भारी प्रसवोत्‍तर अवसाद का प्रकरण होना है। इससे महिला उत्‍सुक, थकावट भरी, निक्रिय तथा निस्‍नेज हो सकती है।
    • यदि आप अपने किसी प्रसव के तुरंत बाद प्रियजन को इस प्रकार की स्‍थिति में पाएं, यह आवश्‍यक है कि उनसे उनकी भावनाओं के बारे में बात करें तथा अपने डॉक्‍टर या मनोचिकित्‍सक से आवश्‍यक सहायता प्राप्‍त करें।

 

प्रसवोत्‍तर शिशु की देखरेख

नवजात शिशु के सामान्‍य देखरेख में आवश्‍यक पोषण हेतु स्‍तनपान कराना, बच्‍चे को गर्माहट प्रदान करना, स्‍वस्‍थ स्‍किन केयर तथा बच्‍चों के सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सुझावों के लिए उसकी समस्‍याओं की पहचान करना तथा परमर्श लेना।

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बच्‍चों का टीकाकरण

  • बच्‍चों को खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए बच्‍चों को दिए जाने वाले टीके को टीकाकरण कहा जाता है।
  • टीका प्रतिरोधक रोग में बच्‍चों को यदि उचित समय में उचित खुराक पिलाई जाए तो बच्‍चा यदि उन बीमारियों के संस्‍पर्श में भी आता है तब भी उससे उसका बचाव होता है।
  • व्‍यक्‍तिगत स्‍तर पर, टीकाकरण व्‍यक्‍ति को बीमारियों के होने से बचाव करती है। इसके अतिरिक्‍त, सामुदायिक स्‍तर पर, टीकाकरण से बीमारी के फैलने से बचाव होता है और जिसके परिणाम स्‍वरूप वह निर्मूल हो जाती है। भारत में टीकाकरण 7 जानलेवा बीमारियों - टीवी, हैपाटाइटिस बी, टिटनेस, मीजल्स, (र्प्‍ट्यूसिस) पोलियो तथा डिप्‍थीरिया से बचाव करती है। टीके शत प्रतिशत असरकारी नहीं होते हैं लेकिन निवारक बीमारियों के प्रति व्‍यक्‍ति को बचाने के लिए नितांत आवश्‍यक है। कुछ टीका का दुस्‍प्रभाव बच्‍चों पर पड़ सकता है। ऐसे मामले में, चिकित्‍सक या अस्‍पताल/केंद्र से टीका प्राप्‍त हुआ से संपर्क करें। कुछ मामलों में, टीकाकरण को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। अपने बच्‍चे को टीका दिलवाने से पहले यदि आपका बच्‍चा किसी बीमारी से पीड़ित है तो उसकी सूचना डॉक्‍टर को दें।
  • भारत में टीकाकरण 7 जानलेवा बीमारियों - टीवी, हैपाटाइटिस बी, टिटनेस, मीजल्स, (र्प्‍ट्यूसिस) पोलियो तथा डिप्‍थीरिया से बचाव करती है।
  • टीके शत प्रतिशत असरकारी नहीं होते हैं लेकिन निवारक बीमारियों के प्रति व्‍यक्‍ति को बचाने के लिए नितांत आवश्‍यक है।
  • कुछ टीका का दुस्‍प्रभाव बच्‍चों पर पड़ सकता है। ऐसे मामले में, चिकित्‍सक या अस्‍पताल/केंद्र से टीका प्राप्‍त हुआ से संपर्क करें।
  • कुछ मामलों में, टीकाकरण को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। अपने बच्‍चे को टीका दिलवाने से पहले यदि आपका बच्‍चा किसी बीमारी से पीड़ित है तो उसकी सूचना डॉक्‍टर को दें।

 

टीकाकरण सारिणी

  • बच्‍चों को प्रारंभिक उम्र में कई टीकों की आवश्‍यकता होती है। इन्‍हें सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार किया जाना चाहिए।
  • सरकार द्वारा प्रसारित टीकाकरण कार्यक्रम को जानने के लिए कृपया मिशन इन्‍द्रधनुष पर जाएं। मिशन इन्‍द्रधनुष पर जाएं

 

अपने बच्‍चे को किसी प्रकार प्रतिरक्षित करें?

  • सरकारी अस्‍पतालों या आंगनवाड़ी केंद्रों पर यूआईपी राष्‍ट्रीय प्रतिरक्षण स्‍कीम के अंतर्गत ‘टीका प्रतिरोधक रोग’ हेतु निशुल्‍क रूप से बच्‍चों तथा शिशुओं के लिए प्रतिरक्षण उपलब्‍ध है।
  • निजी अस्‍पतालों और डॉक्‍टरों द्वारा भी टीकाकरण किया जा सकता है।

प्रतिरक्षण पर अधिक जानकारी के लिए कृपया मिशन इंद्रधनुष पर क्‍लिक करें मिशन इंद्रधनुष पर क्‍लिक करें