महिलाओं के साथ हिंसा के रूप

महिलाओं के साथ घर के भीतर अथवा घर के बाहर हिंसा हो सकती है । महिलाओं को हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने और कर्ता को दंड देने के संबंध में विद्यमान कानूनों का ब्यौरा नीचे दिया गया है । .

 

  • इसका क्या अर्थ है? - जब कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थल पर अन्य लोगों को परेशान करते हुए कोई अश्लील कृत्य करता है अथवा किसी सार्वजनिक स्थल पर या उसके निकट कोई अश्लील गाना,गीत अथवा कोई अश्लील शब्द गाता अथवा बोलता है ।
  • कानून क्या है ? - भारतीय दंड संहिता की धारा 294
  • दंड क्या है? - 3 माह तक कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों । .
  • इसका क्या अर्थ है? - जब कोई व्यक्ति किसी महिला की शालीनता को अपमानित करने के इरादे से यह सोचते हुए कोई शब्द बोलता है, कोई ध्वनि अथवा इशारा करता है या कोई वस्तु दिखाता है कि इस प्रकार का शब्द अथवा ध्वनि महिला द्वारा सुनी जाएगी या इस प्रकार का इशारा अथवा वस्तु देखी जाएगी अथवा उस महिला की निजता में घुसपैठ करता है ।
  • कानून क्या है ? - भारतीय दंड संहिता की धारा 509
  • दंड क्या है? - 3 वर्ष तक कारावास अथवा जुर्माना । .
  • इसका क्या अर्थ है? - यदि कोई व्यक्तिनिजी कृत्य में संलग्न किसी महिला को ताकता है अथवा उसका फोटो लेता है, जिसमें निजता की अपेक्षा वाले किसी स्थान पर ताकना भी शामिल है, और जहां, पीड़िता के जननांग, नितम्ब अथवा स्तन निर्वस्त्र हैं अथवा मात्र अंदर के कपड़ों से ढके हैं; अथवा पीड़िता शौचालय का प्रयोग कर रही है; अथवा कोई व्यक्ति ऐसी यौन क्रिया करता है, जो सामान्यत: सार्वजनिक रूप से नहीं की जाती है ।
  • कानून क्या है ? - भारतीय दंड संहिता की धारा 354सी
  • दंड क्या है? - प्रथम दोषसिद्धि पर 1-3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना । दूसरी बार अथवा उसके पश्चात दोषसिद्धि पर 3-7 वर्ष का कारावास और जुर्माना ।
  • इसका क्या अर्थ है? - यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की अरूचि के स्पष्ट संकेतकों के बावजूद उससे बातचीत करने के लिए बार-बार उसका पीछा करता है और उससे संपर्क करता है या उससे संपर्क करने का प्रयास करता है; अथवा किसी महिला द्वारा इंटरनेट, ईमेल अथवा इलैक्ट्रॉनिक संप्रेषण के किसी अन्य साधन के प्रयोग पर निगरानी रखता है ।
  • कानून क्या है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 354डी
  • दंड क्या है? - प्रथम दोषसिद्धि पर 1-3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना । उसके पश्चात दोषसिद्धि पर 5 वर्ष का कारावास और जुर्माना ।
  • इसका क्या अर्थ है? - यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर आक्रमण करता है अथवा उसके साथ आपराधिक बल का प्रयोग करता है अथवा उसे निर्वस्त्र करने के इरादे से इस प्रकार के कृत्य के लिए उकसाता है या उसे नग्न होने के लिए बाध्य करता है ।
  • कानून क्या है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 354बी
  • दंड क्या है? - 3-7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना ।.
  • इसका क्या अर्थ है? - यौन उत्पीड़न में शामिल है :
    • शारीरिक संपर्क और प्रस्ताव, जिसमें अस्वीकार्य और स्पष्ट यौन प्रस्ताव शामिल है ।
    • यौन अनुग्रह की मांग अथवा अनुरोध
    • यौन रंजित टिप्पणी
    • बलात् अश्लील साहित्य दिखाना
    • यौन प्रकृति का कोई अन्य अस्वीकार्य शारीरिक, मौखिक अथवा गैर-मौखिक आचरण
  • कानून क्या है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए
  • दंड क्या है? खंड (i), (ii) अथवा (iii) में वर्णित अपराध के लिए 3 वर्ष तक का कठोर कारावास अथवा जुर्माना या दोनों । अन्य मामलों में 1 वर्ष तक कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों ।
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिला आपराधिक कार्रवाई के अलावा कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध एवं निराकरण) अधिनियम 2013 के अंतर्गत शिकायत भी दर्ज करा सकती है । अधिनियम में, प्रत्येक संगठन में गठित आंतरिक शिकायत समिति अथवा प्रत्येक जिले में गठित स्थानीय शिकायत समिति द्वारा आयोजित की जाने वाली जांच के माध्यम से उपचार का प्रावधान है । .
  • दंड क्या है? - संगठन की सेवा नियमावली में यथा-विहित । यदि सेवा नियमावली नहीं बनी है, तो दंड के उदाहरण नीचे दिए गए हैं :
    • अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें लिखित क्षमा याचना, फटकार, चेतावनी, निंदा शामिल है ।
    • पदोन्नति/वेतन बढ़ोत्तरी/वेतन वृद्धि रोक लेना
    • नियोजन समाप्ति
    • परामर्श दिलाना
    • सामुदायिक सेवा
  • इसका क्या अर्थ है? - घरेलू हिंसा घर के भीतर ऐसे लोगों द्वारा महिला के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक, यौन, भावनात्मक, आर्थिक हिंसा करना है, जिनका महिला के साथ पारिवारिक संबंध हो, (जन्म का और वैवाहिक दोनों परिवार शामिल हैं) ।निर्दयता का अर्थ है, जानबूझ कर किया गया ऐसा कोई आचरण, जिससे महिला द्वारा आत्महत्या करने के लिए प्रेरित होने की संभावना हो अथवा उसे कोई गंभीर चोट या महिला के जीवन, शरीर के किसी अंग अथवा स्वास्थ्य (चाहे मानसिक या शारीरिक) को खतरा पहुंचाया जाए; अथवा महिला को या उसके किसी संबंधी को कोई गैर-कानूनी मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के लिए उत्पीड़ित किया जाए ।
  • कानून क्या है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए पति अथवा उसके सगे-संबंधियों द्वारा निर्दयता के विरूद्ध संरक्षण प्रदान करती है और महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 महिला को संरक्षण आदेश, आवास आदेश, बच्चों की अस्थायी अभिरक्षा, आर्थिक राहत और क्षतिपूर्ति आदेश के रूप में उपचार प्रदान करता है ।
  • दंड क्या है? - निर्दयता के मामले में, पति अथवा उसके सगे-संबंधियों को 3 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा । महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत संरक्षण आदेश का उल्लंघन 1 वर्ष तक के कारावास और 20,000/-रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों के साथ दंडनीय है ।
  • इसका क्या अर्थ है? - महिला के विवाह के 7 वर्षों के भीतर जलने, चोट लगने अथवा किसी अन्य अप्राकृतिक कारण से उसकी मृत्यु । शर्त यह है कि महिला की मृत्यु से पूर्व उसके साथ उसके पति अथवा पति के सगे-संबंधियों द्वारा दहेज को लेकर निर्दयतापूर्ण व्यवहार किया गया हो । यह सिद्ध करने का दायित्व महिला के पति और ससुराल पक्ष का है कि महिला की मृत्यु उनके दुर्व्यवहार के कारण नहीं हुई ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी
  • दंड क्या है?- सात वर्ष के कारावास से आजीवन कारावास
  • इसका क्या अर्थ है? - ऐसा विवाह, जिसमें लड़की की आयु 18 से कम और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम हो ।
  • कानून क्या है? - बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
  • दंड क्या है ? - अधिनियम के अंतर्गत उन लोगों के दंडित किया जाता है, जो बाल विवाह को बढ़ावा देते हैं, उसे संपन्न कराते हैं और उसके लिए अवप्रेरित करते हैं अथवा 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ विवाह करने वाला 21 वर्ष से अधिक आयु का कोई व्यक्ति । 2 वर्ष तक का कारावास और 1,00,000/-रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों ।
  • इसका क्या अर्थ है? - 18 वर्ष से कम आयु की किसी महिला अथवा 16 वर्ष से कम आयु के किसी लड़के अथवा विक्षिप्त मस्तिष्क के किसी व्यक्ति को उसके कानूनी अभिभावक की स्वीकृति के बिना अभिभावक की अभिरक्षा से ले जाना अथवा उसे प्रलोभन देना ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 361
  • दंड क्या है ? - 7 वर्ष तक का कारावास अथवा जुर्माना
  • कानून उस व्यक्ति को संरक्षण प्रदान करता है, जो नेकनीयती से मानता है कि वह कानूनी अभिरक्षा का हकदार है अथवा जो मानता है कि वह कानूनी विवाह से इतर जन्मे बच्चे का पिता है ।
  • इसका क्या अर्थ है? - किसी महिला का इस इरादे से अपहरण करना अथवा उसे भगाकर ले जाना कि उसे उसकी इच्छा के विरूद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किया जाएगा अथवा अवैध समागम के लिए उस पर दबाव डाला जाएगा या उसका शील भंग किया जाएगा ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 366 (महिला की स्पष्ट सहमति के बिना किया गया कृत्य)
  • दंड क्या है ? - 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना ।
  • इसका क्या अर्थ है? - धमकी, बल या किसी अन्य प्रकार की ज़ोर-ज़बरदस्ती द्वारा या भगाकर ले जाकर, धोखाधड़ी, छल, अधिकारों के दुरुपयोग, लालच, जिसमें भुगतान अथवा लाभ लेना या देना शामिल है, द्वारा शोषण (शारीरिक अथवा किसी प्रकार के यौन) के प्रयोजनार्थ किसी व्यक्ति/व्यक्तियों की भर्ती, एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना, आश्रय देना, स्थानांतरण अथवा प्राप्ति ।
  • संरक्षण क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 370
  • दंड क्या है ? - 7-10 वर्ष तक का सश्रम कारावास और जुर्माना । एक से अधिक व्यक्तियों अथवा किसी अवयस्क के अवैध व्यापार के मामले में 10 वर्ष से लेकर आजीवन सश्रम कारावास और जुर्माना । एक से अधिक अवयस्कों के अवैध व्यापार के मामले में 14 वर्ष से लेकर आजीवन सश्रम कारावास और जुर्माना । एक बार से ज्यादा बार अवयस्कों के अवैध व्यापार अथवा किसी सरकारी नौकर या पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसा अपराध किए जाने के मामले में आजीवन कारावास और जुर्माना ।
  • यौन शोषण के लिए व्यक्तियों का अवैध व्यापार अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के अंतर्गत भी आता है ।
  • इसका क्या अर्थ है? - तेज़ाब डालने में किसी व्यक्ति द्वारा तेज़ाब अथवा किसी अन्य क्षयकारी पदार्थ के प्रयोग से जानबूझ कर गंभीर चोट पहुंचाना शामिल है । तेज़ाब से किसी व्यक्ति पर आक्रमण का प्रयास भी अपराध है ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 326ए - 326बी
  • दंड क्या है ? - 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और पीड़िता के चिकित्सा खर्च के लिए समुचित जुर्माना । किसी पर तेज़ाब से आक्रमण का प्रयास 5-7 वर्ष तक कारावास और जुर्माने से दंडनीय है । जुर्माना सीधे पीड़िता को दिया जाएगा ।
  • चिकित्सा उपचार - आपराधिक प्रक्रिया संहिता के धारा 357ग के अंतर्गत सभी अस्पतालों (सरकारी, प्राइवेट आदि) से यह अपेक्षित है कि तेज़ाब फेंके जाने की शिकार महिला को तत्काल नि:शुल्क प्राथमिक उपचार या चिकित्सा उपचार प्रदान करें और इस प्रकार की घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें । इसका अनुपालन न किए जाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 166बी के अंतर्गत एक वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं ।
  • आर्थिक सहायता - हाल ही में भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि तेज़ाब फेंके जाने पर जिंदा बच जाने वाले व्यक्तियों को तत्काल अस्थायी राहत के रूप में एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता (पीड़ित प्रतिपूर्ति स्कीम के अंतर्गत दी जाने वाली राशि के अलावा) प्रदान की जाए । एक लाख रुपये की यह अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) के अंतर्गत प्रदान की जाएगी । इस लाभ की प्राप्ति के लिए संबंधित जिले का जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त निर्धारित प्रपत्र में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजेगा, जिसकी एक प्रति प्रधान मंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी । गृह मंत्रालय से रिपोर्ट प्राप्त होने पर पांच कार्य दिवसों के भीतर प्रतिपूर्ति की राशि बैंक खाते में भेज दी जाएगी । अधिक जानकारी के लिए कृपया नोडल अधिकारी, श्री एस.के. भल्ला, निदेशक (सीएस-।), सीएस प्रभाग, गृह मंत्रालय, पांचवीं मंज़िल, एनडीसीसी-।। भवन, जयसिंह रोड, नई दिल्ली, दूरभाष : 011-23438138, ईमेल : dircs1-mha@nic.in (लिंक से ईमेल) पर संपर्क करें ।
  • 27 दिसम्बर, 2016 को अधिसूचित विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 में अब तेज़ाब से घायल हो जाना एक प्रकार की विकलांगता है । इससे पीड़ितों को वे सभी लाभ और सेवाएं मिल सकती हैं, जो विकलांग व्यक्तियों को उपलब्ध हैं ।
  • इसका क्या अर्थ है? - यदि कोई पुरुष निम्नलिखित कार्य करता है तो इसे बलात्कार करना समझा जाएगा :
    • किसी महिला की योनि, मुख, मूत्रमार्ग अथवा मलद्वार को अपने लिंग को किसी भी सीमा तक प्रवेश कराता है अथवा अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ महिला से ऐसा करवाता है
    • किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग अथवा मलद्वार में कोई वस्तु या शरीर का कोई भाग, लिंग के अलावा, किसी भी सीमा तक डालता है अथवा अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ महिला से ऐसा करवाता है।
    • किसी महिला के शरीर के किसी भाग पर दबाव डालता है, जिससे उस महिला की योनि, मूत्रमार्ग, मलद्वार अथवा उस महिला के शरीर के किसी भाग में लिंग प्रवेश हो जाता है अथवा वह व्यक्ति अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ महिला से ऐसा करवाता है ।
    • किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग अथवा मलद्वार में मुह डालता है अथवा अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ महिला से ऐसा करवाता है ।
    • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 294

ऐसा कृत्य निम्नलिखित श्रेणियों में से किसी एक श्रेणी के अंतर्गत आना चाहिए :

1.महिला की इच्छा के विरूद्ध

2.उसकी सहमति के बिना

3.उसकी सहमति से, जब सहमति महिला को अथवा किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे महिला चाहती है, मृत्यु या आघात का डर दिखाकर प्राप्त की गई हो ।

4.उसकी सहमति से, जब पुरुष यह जानता हो कि वह उस महिला का पति नहीं है और यह कि महिला की सहमति इसलिए मिली है कि मानती है कि वह दूसरा व्यक्ति है, जिससे वह कानूनी तौर पर विवाहित है अथवा वह ऐसा मानती है ।

5.उसकी सहमति से, जब इस प्रकार की सहमति देते समय, विक्षिप्तता के कारण नशीला पदार्थ अथवा पुरुष या स्वयं अथवा किसी अन्य व्यक्ति के जरिए सम्मोहक अथवा हानिकर पदार्थ देने के कारण महिला सहमति के कृत्य की प्रकृति और उसके दुष्परिणामों को समझने में असमर्थ होती है ।

6.महिला की सहमति से अथवा उसकी सहमति के बिना, जब वह 18 वर्ष से कम आयु का हो ।

7.जब वह सहमति व्यक्त करने में सक्षम न हो ।

सहमति का अर्थ है स्वेच्छा से स्पष्ट सहमति, जब कोई महिला शब्दों, संकेतों अथवा किसी भी तरह के मौखिक या गैर-मौखिक सम्प्रेषण से विशिष्ट यौन कृत्य में शामिल होने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त करती है (बशर्ते कि जो महिला लिंग प्रवेश के कृत्य का बलपूर्वक विरोध नहीं करती तो केवल इस कारण से उसे यौन क्रिया के लिए सहमत होना नहीं माना जाएगा ।

अपवाद 1 - कोई चिकित्सा क्रियाविधि अथवा कार्रवाई बलात्कार नहीं होगा ।

अपवाद 1 - कोई चिकित्सा क्रियाविधि अथवा कार्रवाई बलात्कार नहीं होगा ।

  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 375, 376
  • दंड क्या है ? - 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना । यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ, जो पृथक्करण के आदेश के अंतर्गत या अन्यथा अलग रह रही हो, पत्नी के सहमति के बिना यौन समागम करता है तो इसके लिए वह 2-7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित होगा । कतिपय अन्य मामलों में 5-10 वर्ष तक के कारावास और कुछ अन्य मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने का दंड निर्धारित है । यदि कोई पुरुष बलात्कार के दौरान महिला को चोट पहुंचाता है, जिसके कारण महिला की मृत्यु हो जाती है या वह अविरल निष्क्रियता की स्थिति में पहुंच जाती है तो इसके लिए 20 वर्ष से लेकर आजीवन कठोर कारावास अथवा मृत्यु दंड का प्रावधान है । दोबारा ऐसा अपराध करने की सज़ा आजीवन कारावास अथवा मृत्यु दंड है ।
  • 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने वाले पुरुष को बाल यौन अपराध संरक्षण विधेयक, 2012 की धारा 5(एन) और 9(एन) के अंतर्गत आरोपित किया जा सकता है । इन धाराओं में बच्चे पर उसके सगे-संबंधी (रक्त/विवाह/अभिभावकता/फोस्टर देखरेख के माध्यम से संबंध) द्वारा यौन आक्रमण को गंभीर वेधन यौन आक्रमण अथवा गंभीर यौन आक्रमण के रूप में परिभाषित किया गया है । तथापि, उक्त अधिनियम की धारा 42(ए) में स्पष्ट रूप से कहा गया है किइस अधिनियम के उपबंध इस समय लागू किसी अन्य कानून के उपबंधों के अलावा होंगे न कि उनके अपकर्ष में और परस्पर विरोध की स्थिति में इस अधिनियम के उपबंध किसी अन्य कानून के उपबंधों की तुलना में परस्पर विरोध के मामलों में अधिक प्रभावी होंगे ।
  • ्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ बलात् यौन संबंध स्थापित करना धारा 375 के अनुसार अपराध नहीं हैं, किंतु इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत निदर्यतापूर्ण कृत्य अथवा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत घरेलू हिंसा माना जा सकता है ।
  • इसका क्या अर्थ है? - यदि किसी महिला के साथ एक से अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा सामान्य इरादे से बलात्कार किया जाता है तो समूह में से प्रत्येक व्यक्ति द्वारा बलात्कार किया गया समझा जाएगा ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी
  • दंड क्या है ? - 20 वर्ष से लेकर आजीवन कठोर कारावास और जुर्माना बशर्ते जुर्माना पीड़िता के उपचार और पुनर्वास के लिए उचित और उपयुक्त हो और यह कि इस धारा के अंतर्गत लगाया गया जुर्माना पीड़िता को दिया जाएगा ।
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 357ए में कहा गया है किप्रत्येक राज्य सरकार केंद्र सरकार के समन्वय से उस पीड़िता, जिसने नुकसान उठाया है या जिसे चोट लगी है और जिसका पुनर्वास किया जाना अपेक्षित है, अथवा उसके आश्रितों को क्षतिपूर्ति करने के प्रयोजनार्थ एक स्कीम तैयार करेगी । स्कीम में बलात्कार, तेज़ाब फेंके जाने और महिलाओं के साथ होने वाले अन्य अपराधों के बाद जीवित बचे लोगों की क्षतिपूर्ति करना शामिल है ।

साइबर अपराध अपराधों की एक नई श्रेणी है, जो इंटरनेट और आईटी समर्थित सेवाओं के व्यापक प्रयोग के कारण तेज़ी से बढ़ रहे हैं । संप्रेषण तक सुगम पहुंच और अज्ञात नामों के कारण इंटरनेट और सोशल मीडिया के असामाजिक तत्वों, संबद्ध समूहों और यहां तक कि अपराधियों द्वारा दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है । अनैतिक और आपराधिक गतिविधियों के लिए और वैमनस्य फैलाने के लिए इंटरनेट का दोहन समाज के सम्मुख न केवल एक बड़ा खतरा है, बल्कि विधि प्रवर्तन अभिकरणों के लिए यह एक चिंता का गंभीर विषय बनता जा रहा है ।

 

साइबर प्रतिरुपण

  • इसका क्या अर्थ है? - जब कोई व्यक्ति किसी संचार उपकरण के किसी साधन अथवा कम्प्यूटर संसाधन का प्रयोग धोखाधड़ी के प्रयोजनार्थ किसी अन्य व्यक्ति के प्रतिरुपण के लिए करता है । उदहारण के तौर पर, समीर उस कम्पनी के नाम पर, जहां वह कार्यरत है, नकली वेबसाइट बनाता/बनवाता है और उस कम्पनी की सहमति या अनुमति के बिना व्यवसाय करना शुरू कर देता है ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 66डी
  • दंड क्या है ? - 3 वर्ष तक कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना ।

साइबर रतिक्रियावाद

  • इसका क्या अर्थ है? - जब कोई व्यक्ति जानबूझ कर किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजता का उल्लंघन करते हुए उसके प्राइवेट क्षेत्र का फोटो अथवा वीडियो बनाता है, प्रकाशित करता है अथवा संप्रेषित करता है, तो इसे साइबर रतिक्रियावाद कहा जाता है ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 66ई
  • दंड क्या है ? - 3 वर्ष तक का कारावास अथवा 2 लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों ।

साइबर अश्लील सामग्री

  • इसका क्या अर्थ है? -अश्लील सामग्री का शाब्दिक अर्थ हैपुस्तकों, फिल्मों आदि के माध्यम से यौन उत्तेजना पैदा करने के लिए यौन क्रिया का वर्णन करना अथवा दिखाना । इसमें अश्लील वेबसाइट; कम्प्यूटर के माध्यम
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 67 (इलैक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री का प्रकाशन अथवा संप्रेषण)
  • दंड क्या है ? - प्रथम दोषसिद्धि पर 3 वर्ष तक का कारावास और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना । पुन: दोषसिद्धि पर 5 वर्ष तक कारावास और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 67ए (स्पष्ट यौन कृत्यों आदि वाली सामग्री का इलैक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशन अथवा संप्रेषण)
  • धारा 67ए के तहत दंड क्या है? - प्रथम दोषसिद्धि पर 5 वर्ष तक का कारावास और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना । पुन: दोषसिद्धि पर 7 वर्ष तक का कारावास और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना ।
  • कानून क्या है? - भारतीय दंड संहिता की धारा 67बी (बच्चों को स्पष्ट रूप से यौन कृत्यों में दिखाते हुए सामग्री का इलैक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशन अथवा संप्रेषण) बाल अश्लील साहित्य भी पोक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत अपराध है ।
  • धारा 67बी के अंतर्गत दंड क्या है? - प्रथम दोषसिद्धि पर 5 वर्ष तक कारावास और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना । पुन: दोषसिद्धि पर 7 वर्ष तक का कारावास और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना ।
  • बशर्ते की धारा 67, 67ए और धारा 67बी के प्रावधान इलैक्ट्रॉनिक रूप में किसी पुस्तक, चौपन्ने, दस्तावेज, लेख, चित्र, पेंटिंग, निरुपण और आकृति पर लागू नहीं होते।