महिलाओं की सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं
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महिलाओं में कुछ स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं अधिक प्रचलित तथा सामान्‍य हैं। नियमित रूप से अपने पारिवारिक डॉक्‍टर के पास जाने से इस प्रकार के रोग या बिमारी से बचा जा सकता है। महिलाओं में देखी जाने वाली कुछेक सबसे आम स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी भ्रांतियां इस प्रकार हैं:-

  • स्‍तन कैंसर वह स्‍थिति है जहां स्‍तन की कोशिकाएं कैंसारात्‍मक हो जाती हैं। यह महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे सामान्‍य कैंसर है।
  • अनेक अनुसंधानों के पश्‍चात, विश्‍व भर में स्‍तन कैंसर से बचाव दर में वृद्धि आई है। प्रारंभिक स्‍तर स्‍तन कैंसार की पहचान करने में मेमोग्राम सफल है जो इसके इलाज को कम कठोर पद्धति से कर पाने को सरल बनाती है।
  • हालांकि यह पुरूष तथा महिलाओं दोनों में हो सकता है, महिलाओं की शारीरिक बनावट के कारण उनमें इसके होने की अधिक सम्‍भावना रहती है।

चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

स्‍तन कैंसर, कैंसरों के अधिक दिखाई देने वालते रूपों में से एक है और इसे कुछ शारीरिक परिवर्तनों से ही देखा जा सकता है। जिसमें शामिल है:

  • स्‍तन में गांठ या उभार होना जो इर्दगिर्द की त्‍वचा की तुलना में अलग लगता हो
  • स्‍तन के आकार, रूप या बनावट में बदलाव आना
  • उस क्षेत्र के चमड़े के रंग में परिवर्तन आना
  • चमड़े का हिलना, खुश्‍क होना या पपड़ी उठना
  • स्‍तन के आस-पास की त्‍वचा का लाल होना

इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?

  • बढ़ती आयु, स्‍तन कैंसर का निजी इतिहास, वंशानुगत कैंसर की संभावना, मोटापा और अन्‍य बहुत से तथ्‍य किसी भी व्‍यक्‍ति को स्‍तन कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ाते हैं। नियमित स्‍तन कैंसर स्‍क्रीनिेंग और मैमोग्राम से प्रारंभिक स्‍तर में कैंसर को पकड़ पाते हैं तथा उसका इलाज हो पाता है।
  • तथापि, यदि पहले से ही इसके लक्षण मौजूद हों, किसी डॉक्‍टर से आगे की जांच तथा उपचार के लिए तुरंत परामर्श करें।
  • https://www.youtube.com/watch?v=c5Yogswb2XM
  • ग्रीवा कैंसर गर्भाशय ग्रीवा में होता है जो गर्भाशय का निचला भाग है। ग्रीवा कैंसर के होने में यौन गतिविधियों के दौरान संक्रमित ह्यूमन पैपीलोम वायरस (एचपीवी) के उपमेदों की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है।

चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

  • ग्रीवा कैंसर के प्रारंभिक चरण में कोई प्रत्‍यक्ष चिन्‍ह या लक्षण नजर नहीं आता है, अधिक उन्‍नत चरण में यौन संबंध के दौरान, माहवारी चक्र या रजोनिवृत्‍ति के पश्‍चात योनी से रक्‍तस्राव देखा जाता है। इसमें पेड़ु में दर्द से भी पहचाना जाना है।

इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?

  • यदि लक्षण मौजूद हों, तो अपने डॉक्‍टर से अवश्‍य भेंट करें जो कुछ जांच करेंगे जिससे यह पता चलेगा कि कैंसरात्‍मक कोशिकाएं उपस्‍थित हैं अथवा नहीं। समय पूर्व पहचान से जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
  • महिलाएं स्‍वास्‍थ्‍य जांच तथा स्‍क्रीनिंग परीक्षण अवश्‍य करवांए तथा ग्रीवा कैंसर के लिए 21 वर्ष की आयु के बाद से एचपीवी टीका भी लें।
  • गर्भाशय कैंसर वह कैंसर है जो गर्भाशय में होता है। यह कैंसर केवल महिलाओं में ही पाया जाता है।
  • जितनी जल्‍दी इस कैंसर का पता चल जाता है इससे ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक हो जाती है। तथापि, गर्भाशय कैंसर का पेड़ु तथा पेट के निचले हिस्‍से तक फैलने तक पता नहीं चल पाता है।

चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

  • पेट के निचले हिस्‍से में सूजन या फूलना
  • योनि से रक्‍तस्राव
  • अकारण वजन का घटना या बढ़ना
  • पेड़ु के क्षेत्र में दर्द होना
  • आंत्र की आदतों में परिवर्तन
  • बार-बार पेशाब लगना

इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?

  • यदि इनमें से कोई भी संकेत या लक्षण हो या उनके परिवार में गर्भाशय/स्‍तन कैंसर का इतिहास रहा हो तो उसे अपने डॉक्‍टर से तुरंत मिलना चाहिए।

पोलीसिस्‍टिक गर्भाशय सिंड्रोम कुछ हॉर्मोन्‍स असंतुलन और मैटाबोलिज्‍म के मुद्दों को प्रभावित करते हैं जो महिलाओं के समूचे स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है।

चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

पोलीसिस्‍टिक गर्भाशय सिंड्रोम के कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिनसे स्‍वयं इसकी पहचाने की जा सकती हैं । निम्‍नलिखित लक्षणों को देखें:-

  • अचानक से शरीर, चेहरा, पैर और हाथों में बालों का आना
  • कुछ समय पश्‍चात मासिक धर्म या अवधि चक्र का अनियमित होना
  • चेहरे, छाती तथा कमर पर अचानक से मुंहासे निकलना
  • बाल पतले होना, बालों का गिरना या पुरुषों की तरह गंजापन होना
  • अचानक से वजन बढ़ना या वजन नहीं हो पाना
  • उस जगह की त्‍वचा का कला पड़ना तथा त्‍वचा चिन्‍हों का विकसित होना

इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?

  • यदि यह लक्षण मौजूद हो, डॉक्‍टर के पास जाएं, जो जांच के पश्‍चात आपको मधुमेह या बांझपन जैसी दीर्घकालिक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं से बचने के लिए विशेष उपचार योजना बनाएगा
  • आपके डॉक्‍टर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार आहार में बदलाव लाकर पीसीओएस का नियंत्रण या उससे बचाव किया जा सकता है। दैनिक व्‍यायाम में वृद्धि, शारीरिक कार्यकलापों में वृद्धि और वजन को नियंत्रण में रखना पीसीओएस को नियंत्रित करने के कुछ तरीके हैं।
  • रक्‍ताल्‍पता वह स्‍थिति है जब शरीर में कोशिकाओं तक ऑक्‍सीजन पहुंचाने के लिए आवश्‍यक लाल रक्‍त कोशिकाओं की पर्याप्‍त मात्रा नहीं होती है। लाल रक्‍त कोशिकाओं में कमी, रक्‍त प्रवाह के कारण क्षति या जब शरीर पर्याप्‍त लाल रक्‍त कोशिका उत्‍पन्‍न नहीं करता हो या उसे नष्‍ट करने से होती है।
  • लाल रक्‍त कोशिकाएं आवश्‍यक होती हैं क्‍योंकि उनमें हिमोग्‍लोबिन होता है जो फेफड़ों से ऑक्‍सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचानेमें समर्थ बनाती है।
  • रक्‍ताल्‍पता ऑयरन की कमी, विटामिन की कमी, पुरानी बिमारी जो लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पदन में बाधक हो, बोन मैरो बिमारी इत्‍यादि के कारण हो सकती है। यदि इसका ईलाज न किया जाए तो रक्‍तल्‍पता से भारी थकावट, गर्भधारण में समस्‍या, हृदयजनित समस्‍याएं और मृत्‍यु तक हो सकती है।

चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

रक्‍ताल्‍पता के लक्षण साधारणत: पता नहीं चलते हैं और जिसके परिणामस्‍वरूप अधिकतर लोगों द्वारा ध्‍यान नहीं दिया जाता है। तथापि, लम्‍बे समय तक रक्‍ताल्‍पता के लक्षण से किसी व्‍यक्‍ति का सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य बिगड़ सकता है। निम्‍नलिखित लक्षणों पर नजर डालें:-

इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?

  • थकावट और कमजोरी
  • बेरंग तथा पीली त्‍वचा
  • अनियमित हृदय गति, सांस फूलना, छाती में दर्द
  • चक्‍कर आना
  • हाथ और पैर ठंडा रहना
  • सिरदर्द
    • थकान एवं कमजोरी : यदि आपको उपरोक्‍त किसी भी लक्षण का अनुभव होता है, अपने पारिवारिक डॉक्‍टर से भेंट करें, जो कम्‍प्‍लीट ब्‍लड काउंट (सीबीसी) की जांच करवाएगा तथा लाल रक्‍त कोशिकाएं के आकार तथा प्रकार को निर्धारित करने वाला जांच करवाएगा। व्‍यक्‍ति की जरूरत के अनुसार डाक्‍टर और अधिक जांच भी करवा सकता है।
    • चूंकि रक्‍ताल्‍पता विभिन्‍न प्रकार तथा रूपों में मौजूद होता है, उपचार प्रक्रिया प्रत्‍येक के लिए अलग होगा। आपको किस प्रकार की रक्‍ताल्‍पता है यह आपके डॉक्‍टर द्वारा ही पता लगाया जाएगा और तदनुसार उपचार किया जाएगा ।
  • यदि किसी व्‍यक्‍ति को अपने आहार और भोजन से पर्याप्‍त मात्रा में पोषण प्राप्‍त नहीं होता है तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है। आहार में पोषण तत्‍वों की कमी, विटामिन की कमी, असंतुलित आहार तथा कुछ चिकित्‍सा संबंधी समस्‍याओं के कारण कुपोषण हो सकता है।
  • वयस्‍कों में कुपोषण कमजोर रोग प्रतिरोधक तंत्र, संक्रमण का अधिक भय, घाव भरने की क्षमता में कमी, मांसपोशियों की कमजोरी में वृद्धि इत्‍यादि नजर आता है। कुपोषण से भूख की कमी हो सकती है जो स्‍थिति को और अधिक दयनीय बना सकती है। कुपोषण कुछ स्‍थितियों जैसे कि दस्‍त, लीवर की बीमारियां, कैंसर के कारण हो सकता है। जो भूख में कमी उत्‍पन्‍न करते हैं, पागलपन, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य स्‍थिति, भोजन पचाने में असमर्थता इत्‍यादि से भी इसे बढ़ावा मिलता है।
  • कुपोषण सामाजिक घटक जैसे अकेले रहना, सामाजिक अलगाव, पोषण ग्रहण के बारे अपर्याप्‍त जानकारी, शराब या ड्रग लेना या कम आय होना और गरीबी के कारण भी हो सकता है।

चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?

  • अचानक वजन में गिरावट (3 से 6 माह में 5 से 10 प्रतिशत शरीर के वजन का कम होना) और 18.5 से कम का बॉडी मास इंडेक्‍स होना।
  • भूख कम होना तथा भोजन में रूचि न रहना
  • लगातार थकावट रहना तथा कमजोरी बढ़ते रहना
  • बार-बार बीमार पड़ना और ठीक होने में अधिक समय लगना
  • घाव भरने में अधिक समय लगना
  • एकाग्रता में कमी
  • मूड पर प्रभाव या डिप्रेशन
  • कुपोषण का उपचार प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति के लिए पृथक होता है और अक्सर आपके स्‍थिति के सामान्‍य घटकों के आधार पर किया जाता है।
    • बच्‍चों के लक्षणों में विकास दर में कमी, व्‍यवहार में बदलाव जैसे तुनकमिजाजी या ऊर्जा स्‍तर का कम होना शामिल है।
    • यदि आपको स्‍वयं में, परिवार के किसी सदस्‍य में या किसी मित्र में, इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए,अपने निजी डॉक्‍टर से संपर्क करें जो जांच करवाएगा तथा आपके लिए विशेष आहार प्‍लान बनाकर देगा : व्‍यक्‍तिगत परिस्‍थितियों के आधार पर डॉक्‍टर पोषण की अतिरिक्‍त गोलियों, फीडिंग ट्यूब्‍स और अन्‍य उपायों की सिफारिश कर सकता है ।
  • यौन संक्रमण/रोग सामान्‍यतया यौन क्रिया द्वारा ही संचारित या अधिग्रहित होता है। तथापि, कुछ मामलों में, यह संक्रमण माता से बच्‍चे को गर्भावस्‍था के दौरान, रक्‍त आधान या सुईयों के पुन: प्रयोग से भी फैलता है।
  • असुरक्षित यौन संबंध, एस्‍टीआई का इतिहास होना, यौन उत्‍पीड़न, गंदी सुईयों के माध्‍यम से नशीला द्रव्‍य लेना एसटीआई होने की संभावना को बढ़ाने वाले कुछ घटक हैं।
  • एसटीआई के कुछ लक्षणों में जननांगों के आस-पास गांठ और सूजन, पेशाब के दौरान दर्द/जलन, प्रवाह तथा यौन कार्यकलापों के दौरान असहज/दर्द होना, अकारण योनी रक्‍तस्राव, निचले पेट में दर्द, हाथों और पैरों में लाल चकत्ते या बुखार शामिल है।
  • यदि इसका ईलाज नहीं किया गया तो, एसटीआई अनेक उलझन उत्‍पन्‍न कर सकता है जैसे कि गर्भधारण समस्‍याएं, बांझपन, हृदय रोग, एचपीवी संबंधित रेक्‍टस या सर्वाइकल कैंसर, गठिया इत्‍यादि।

विभिन्‍न प्रकार की एसटीआई क्‍या हैं?

क्‍लैमाइडिया

हालांकि क्‍लैमाइडिया के लक्षण आमतौर पर नजर नहीं आते हैं और ध्‍यान में नहीं आता है। यदि आपने असुरक्षित यौन संबंध बनाया हो तो निम्‍नलिखित लक्षणों पर नजर डालें:-

  • क्‍लैमाइडिया जननांग पथ में एक बैक्‍टेरियल संक्रमण है जिसे पहचान पाना अक्‍सर कठिन होता है क्‍योंकि इसका लगभग कोई लक्षण नजर नहीं आता है।
  • चेतावनी संकेत क्‍या हैं?
    • पेशाब के समय जलन/दर्द होना
    • योनि से स्राव होना
    • िचले पेट में दर्द
    • योनि से अनियमित रक्‍तस्राव
    • माहवारी के दौरान भारी रक्‍तस्राव

सूजाक

  • सूजाक प्रजनन पथ का एक बैक्‍टीरियल संक्रमण है। यह मुंह, गले, आंख तथा गुदा में भी उत्‍पन्‍न हो सकता है।
  • चेतावनी संकेत क्‍या हैं?

    सूजाक के संकेत तथा लक्षण आमतौर पर नजर नहीं आते हैं तथा अधिकतर लोग इसे देख नहीं पाते हैं। तथापि, यदि आपने असुरक्षित यौन संबंध बनाया हो तो निम्‍नलिखित लक्षणों को देखें:-
    • भारी माहवारी रक्‍तस्राव
    • दर्दनाक आंत्र गतिविधि
    • पेशाब के दौरान जलन
    • योनि से स्राव
    • निचले पेट में दर्द
    • यौन संबंध के पश्‍चात रक्‍तस्राव

एचआईवी-एड्स

  • ह्यूमन इम्‍यूनो डेफिसिऐन्‍सी वायरस और एक्‍वायर्ड इम्‍यूनो डेफिसिऐन्‍सी सिंड्रोम एचआईवी वायरस से उत्‍पन्‍न संक्रमण से होने वाली समस्‍या है। यह संक्रमण सर्वप्रथम इंफ्लूएंजा लक्षण दर्शाता है जो आगे चलकर यह कम प्रतिरोधक के रूप में प्रकट होगा और अन्‍य संक्रमण होने की अधिक संभावना को उत्‍पन्‍न करेगा।
  • एचआईवी एड्स असुरक्षित यौन संबंध, प्रयोग की गई सुईयों या सिरिंजो, स्‍तनपान, गर्भधारण के माध्‍यम से फैल सकता है।
  • इसका ईलाज हो सकता है तथा व्‍यक्‍ति अपनी पूरी आयु जी सकता है परंतु वर्तमान में इसका कोई निदान नहीं है।
  • चेतावनी संकेत क्‍या हैं?
    • निचले पेट में बढ़ता दर्द या खांसने से दर्द
    • थकावट, थकान, खुराक में गिरावट या अत्‍यधिक पसीना आना
    • मुंह में छाले
    • लगातार दस्‍त और उल्‍टी
    • निगलने में कठिनाई तथा सूजन

जननांग दाद

  • जननांग दाद हर्प्‍स सिम्‍प्‍लैक्‍स वायरस (एचएसवी) द्वारा होने वाली एक आम संक्रमण है, यह वही वॉयरस है जिससे कोल्‍ड सोर होता है।
  • इस वायरस के संपर्क में आने के कुछ दिनों के पश्‍चात ही एचएसवी के लक्षण व्‍यक्‍ति में विकसित होता है, जिसके बाद, दर्दनाक छाला या घाव पैदा होता है जो खाज और खुजली उत्‍पन्‍न कर सकता है या पेशाब करने में पीड़ा उत्‍पन्‍न कर सकता है।
  • चेतावनी संकेत क्‍या हैं?
    • जननांग, गुदा तथा आस-पास के क्षेत्र में लाल दाने, छाले, खुले घाव या अल्‍सर
    • जननांग क्षेत्र में दर्द या खुजली

ह्यूमन पेपीलारेमावायरस (एचपीवी) संक्रमण और जननांग मस्‍सा लक्षण

  • जननांग मस्‍सा जननांग या गुदा क्षेत्र के आस-पास छोटा मांसल विकास, फोड़ा या चमड़ी का परिवर्तन है। यह ह्यूमन पेपीलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण से होता है तथा आम एसटीआई प्रकार है।
  • महिलाओं में, यह मस्‍सा वल्‍वा, योनि की दीवार, गुदा, पेड़ु और मुंह तथा गले में भी हो सकता है।
  • चेतावनी संकेत क्‍या हैं?
    • कई बार, जननांग मस्‍सों का कोई लक्षण नजर नहीं आता है। हालांकि इसके कुछ लक्षण होते हैं जिसे देखा जा सकता है।
    • जननांग क्षेत्रमें सूजन
    • एक साथ मस्‍सों का गुच्‍छा होना
    • जननांग क्षेत्र में खुजली या असहजता
    • यौन संबंध के दौरान रक्‍तस्राव

उपदंश

उपदंश के लक्षण निम्‍नलिखित चार चरणों में पाये जाते हैं:-

  • उपदंश एक बैक्‍टिरीयल संक्रमण है जो मुंह अथवा जननांग क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। तथापि, उपदंश दिमाग तथा हृदय सहित शरीर के कई अन्‍य अंगों में भी हो सकता है।
  • उपदंश जो सिर दर्द, व्‍यवहार में परिवर्तन या गतिविधि में समस्‍याएं तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, को न्‍यूरोसिफिलस कहा जाता है।
  • इसके संकेत तथा लक्षण क्‍या हैं?
    • प्राथमिक चरण, इसके संस्‍पर्श में आने के 0 से 3 माह के अंदर जहां संक्रमण हुआ है, छोटा दर्द रहित घाव हो जाना है।
    • माध्‍यमिक चरण संक्रमण के 3 से 6 सप्‍ताह बाद होता है जिसमें किसी भी भाग में लाल या भूरा चकता, बुखार, बढ़े लिम्‍फ नोड्स, थकान, सूजन तथा खाज आदि शामिल हैं।
    • अवयस्‍क चरण, जो कुछ व्‍यक्‍तियों में माध्‍यमिक चरण जैसा ही होता है जिसमें कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। लक्षण सामान्‍यतया अंतिम चरण में वापिस नजर आता है।
    • तृतीयक चरण में बैक्‍टीरिया के फैलाव से आंतरिक अंगों को क्षति या मृत्‍यु तक हो सकती है। इसके चरण के लक्षणों में, बातचीत करने में असमर्थता, पागलपन, लकुवा, अंधापन आदि शामिल हैं।
  • इस बारे में क्‍या किया जा सकता है?
    • यदि आपको उपरोक्‍त संकेतों या लक्षणों में से कुछ भी नजर आता है तो अपने चिकित्‍सक या स्‍त्रीरोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
    • यदि आप यौनक्रिया में सक्रिय हैं या हाल ही में असुरक्षित यौन संबंध में संलिप्‍त हुए हैं तो किसी चिकित्‍सक से भेंट करने में समझदारी है।
    • एसटीआई से बचाव के लिए कंडोम सहित गर्भनिरोधों का प्रयोग बचाव के लिए सर्वाधिक उपयोगी तरीका है।
  • हैपाटाइटिस के तीन विविध प्रकार- हैपाटाइटिस ए, बी और सी होते हैं। हैपाटाइटिस किसी भी व्‍यक्‍ति के लीवर में सूजन उत्‍पन्‍न करता है।
  • चैतावनी संकेत क्‍या हैं?
    • थकावट
    • चक्‍कर आना या उल्‍टी होना/ भूख न लगना
    • बुखार
    • मांसपेशियों में दर्द, जोड़ो में दर्द, निचले पेट में दर्द
  • क्षय रोग एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों पर हमला करती है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। बीमारी की जीवाणु प्रकृति इसे एक व्यक्ति से दूसरे में फैलाने के लिए संभव बनाता है, अक्सर छींकने और खांसी के माध्यम से।
  • एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली तपेदिक प्राप्त करने की संभावना को बढ़ाती है।
  • डॉक्टर सक्रिय टीबी के बीच अंतर करते हैं (जहां स्थिति आपको बीमार और संक्रामक बनाती है) और गुप्त टीबी (जहां बैक्टीरिया शरीर में रहता है लेकिन लक्षणों को प्रेरित नहीं करता है)। एचआईवी / एड्स वाले लोगों, चतुर्थ दवा उपयोगकर्ताओं और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को गुप्त ट्यूबरक्युलोसिस प्राप्त करने के लिए अधिक जोखिम होता है।
  • चेतावनी संकेत क्या हैं?
    • खांसी जो तीन हफ्तों से अधिक समय तक चलती है
    • खूनी खाँसी
    • छाती में दर्द
    • थकान
    • बुखार
    • अनजाने वजन घटाने
    • रात को पसीना