बाल-गृह अपनायें
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    "हम सभी की जरूरत है हमारे दिमाग को बदलना है हमें लोगों के दिल को एकजुट करने की आवश्यकता है। "

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    क्या तुम्हें पता था? दहेज निषेध अधिनियम, 1 9 61 के तहत दहेज देने, लेने, मांगने या विज्ञापन भी सभी अवैध हैं

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अप्रैल,2016 में बाल-गृह अपनाओ कार्यक्रम अधिसूचित किया था जिसके द्वारा बाल-गृहों में रह रहे बच्चों को सहयोग प्रदान करने के लिए कार्पोरेट सेक्टर, व्यापारिक घरानों और लोगों को आमंत्रित किया जाता है।

किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत ये बाल-गृह राज्य सरकारों / केंद्र शासित क्षेत्रों और उनके गैर–सरकारी संगठन साझेदारों द्वारा चलाये जाते हैं। उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट बाल-गृह अपनाने के लिए प्रभारी अधिकारी हैं और इस बारे में संबंधित कार्पोरेट /व्यक्ति के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। संबंधित कार्पोरेट की सामाजिक दायित्व नीति की योजना में निधियों के उपयोग को देखा और दर्शाया जा सकता है।

बाल लिंगानुपात (सीएसआर) दिशा-निर्देशों के तहत संक्षिप्‍त सुझाये गये फोकस क्षेत्र :

  • बाल-गृहों के भौतिक ढांचे को अपग्रेड करन
  • उच्च शिक्षा के लिए प्रायोजक बन
  • वित्तीय साक्षरता और वित्तीय सेवाओं में समावेश, स्व-रोजगार के लिए ऋण और टूल किट्स की व्यवस्था करना
  • खेल-कूद उपकरण, सभागार, नाटक/अभिनय, कला-दीर्
  • स्वास्थ्य देख-रेख में सहयोग, पीडाहर बाल देख-रेख, विषण,मादक द्रव्यों के सेवन,एच आई वी/एडस का उपचार
  • विशेष जरूरतमंद बच्चों के लिए बाल-गृहों के लिए सहयोग
  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मनोवैज्ञानिक-सामाजिक और आर्थिक सहयोग

कृपया अपने जिले में कार्यक्रम के ब्यौरे के लिए अपने जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय से सम्पर्क करें।

दिशा-निर्देश