नियमित स्‍वास्‍थ्‍य जांच
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    "हम सभी की जरूरत है हमारे दिमाग को बदलना है हमें लोगों के दिल को एकजुट करने की आवश्यकता है। "

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एक आयु तक पहुंचने के पश्चात, सम्भावित रोगों के समय से पूर्व पता लगाने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराना आवश्यक है।

  • महिलाओं को बढ़ती उम्र के साथ नियमित स्वास्थ्यजांच कराना अधिक आवश्यक हो जाता है। महिलाओं में बढ़ती आयु का कुछ बीमारियों की संभावना को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ा देता है।
  • लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा नियमित की गई स्वास्थ्य जांच अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखेगा तथा किसी भी बीमारी का प्राथमिक चरण में ही पता लगने की संभावना को बढ़ाएगा।
  • जांच आकस्मिक बीमारी के लागत तथा खर्चे को भी कम करेगा।
  • स्वास्थ्य जांच पड़ताल अक्सर उम्र एवं व्यक्तिगत कारकों के आधार पर जरूरतों एवं आवश्यकता में अंतर करता है। इसलिए एक चिकित्सक की सलाह, परीक्षण का प्रकार निर्धारित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाती है जो किसी अन्य की तुलना में अधिक नियमित रूप से आवश्यक होती है।
  • निम्नलिखित सूची संपूर्ण नहीं है परंतु ये कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य जांच हैं जो नियमित रूप से महिलाओं को करवाते रहना चाहिए।
  • 20 वर्ष की आयु के पश्चात प्रत्येक महिला का रक्तचाप जांच होना चाहिए। मैनुअल मशीन की सहायता से घर पर ही रक्तचाप पर सरलता से नजर रखी जा सकती है। उच्च रक्त चाप के मामले में समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए चिकित्सक जांच करा सकता है।
  • अप्रत्याशित हृदय रोग की संभावना को कम करने के लिए 20 वर्ष की आयु के पश्चात 5 वर्ष में एक बार कोलेस्ट्रोल की जांच करवाएं। उच्च कोलेस्ट्रोल होने से चिकित्सक कुछ अन्य जांच करवाने के लिए भी कह सकता है।
  • महिला द्वारा सामना कर रहे किसी स्त्रीरोग का पता लगाने के लिए पेल्विक जांच करवाना आवश्यक है। पेल्विक जांच की आवश्यकता जब गर्भाशय गांठ, यौन संक्रमण, रसोली या प्राथमिक स्तर कैंसर जैसी विविध विकारों की पहचान करने के लिए है।
  • पैप स्मीयर महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की जांच करने की एक प्रक्रिया है। इस जांच से भविष्य में विकसित होने वाले सर्वाइकल कैंसर को देखने हेतु आस-पास के क्षेत्र की कोशिकाओं में परिवर्तन की जांच की जाती है।
  • मैमोग्राम जांच में महिलाओं के स्तन की एक्स-रे छवि निकाली जाती है जिससे स्तन कैंसर या संभावित मृत्यु का पता लगाया जाता है। समय से पूर्व पता लगाने की समर्थता के कारण नियमित मैमोग्राम से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की विपत्ति में कमी आई है।
  • डॉक्टरों को कैंसरात्मक होने से पूर्व पोलिप्स की पहचान करने तथा हटाने के लिए कोलन कैंसर स्क्रीनिंग कराने की जरूरत है।

 

 

 

  • अपने वजन पर नजर रखना प्रत्येक को नियमित रूप से वजन करवाना चाहिए क्योंकि अधिक वजन बढ़ने से आगे चल कर जीवन में अनेक रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • रक्तचाप
  • कोलेस्ट्रोल प्रोफाइल प्रत्येक को कोलेस्ट्रोल जांच करवाना चाहिए। 20 वर्ष से अधिक की प्रत्येक महिला को अपने कोलेस्ट्रोल के आंकड़ों की जानकारी होनी चाहिए और प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार इसकी जांच भी होनी चाहिए।
  • स्तन की जांच, पेल्विक जांच तथा पेप जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव के लिए आवश्यक जांच। आंख को सुरक्षित रखना आपने इस पर विचार नहीं किया होगा लेकिन 40 वर्ष से पूर्व एक समय पर अपनी आंखों की जांच करवा लेनी चाहिए । अपने रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाए अपने चिकित्सक से आपके लिए आवश्यक नए प्रतिरक्षणों के बारे में जानकारी लें।
  • आंख को सुरक्षित रखना आपने इस पर विचार नहीं किया होगा लेकिन 40 वर्ष से पूर्व एक समय पर अपनी आंखों की जांच करवा लेनी चाहिए ।
  • अपने रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाए अपने चिकित्सक से आपके लिए आवश्यक नए प्रतिरक्षणों के बारे में जानकारी लें।
  • मधुमेह नियमित रूप से अस्वास्थ्यजनक भोजन तथा निरंतर व बढ़ते वजन से अग्नाशय पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 40 वर्ष से अधिक की महिलाएं खाली पेट अपने शुगर की जांच तीन वर्षों में एक बार अवश्य कराएं। स्तनपान जांच और मैमोग्राम प्रत्येक को घर पर ही अपनी छाती के क्षेत्र में नियमित रूप से मस्सा और गांठ की जांच करनी चाहिए परंतु अधिक पेशेवर तथा निर्णायक परिणाम के लिए डॉक्टर के पास अवश्य जाएं। ज्यादातर विशेषज्ञ 40 वर्ष की आयु के बाद मैमोग्राम टेस्ट करवाने की सिफारिश करते हैं। रक्त चाप- बढ़ती उम्र के साथ-साथ रक्तचाप में वृद्धि सामान्यत बात है। तथापि, अधिक जटिलता से बचने के लिए आयु के प्रत्येक पड़ाव में रक्तचाप की जांच करवाते रहना आवश्यक है। अपने वजन पर नजर रखें। पेल्विक जांच और पैप स्मेयर यदि कोई महिला यौन संबंधों में सक्रिय है उसे यह जांच विशेष रूप से करवानी चाहिए। मस्सों पर नजर रखें असाधारण मस्से या चमड़े में बदलाव कैंसर की निशानी हो सकते हैं। यदि शुरूआत में ही इसे देख लिया जाए इससे सफलतापूर्वक ठीक हो सकता है। आंख को सुरक्षित रखना 40 की आयु के पश्चात प्रत्येक को दो वर्षों में एक बार प्रीस्वायोपीया, ग्लौकोमा इत्यादि जैसी सामान्य समस्याओं की जांच करवाना आवश्यक है।
  • स्तनपान जांच और मैमोग्राम प्रत्येक को घर पर ही अपनी छाती के क्षेत्र में नियमित रूप से मस्सा और गांठ की जांच करनी चाहिए परंतु अधिक पेशेवर तथा निर्णायक परिणाम के लिए डॉक्टर के पास अवश्य जाएं। ज्यादातर विशेषज्ञ 40 वर्ष की आयु के बाद मैमोग्राम टेस्ट करवाने की सिफारिश करते हैं।
  • रक्त चाप- बढ़ती उम्र के साथ-साथ रक्तचाप में वृद्धि सामान्यत बात है। तथापि, अधिक जटिलता से बचने के लिए आयु के प्रत्येक पड़ाव में रक्तचाप की जांच करवाते रहना आवश्यक है।
  • अपने वजन पर नजर रखें।
  • पेल्विक जांच और पैप स्मेयर यदि कोई महिला यौन संबंधों में सक्रिय है उसे यह जांच विशेष रूप से करवानी चाहिए।
  • मस्सों पर नजर रखें असाधारण मस्से या चमड़े में बदलाव कैंसर की निशानी हो सकते हैं। यदि शुरूआत में ही इसे देख लिया जाए इससे सफलतापूर्वक ठीक हो सकता है।
  • आंख को सुरक्षित रखना 40 की आयु के पश्चात प्रत्येक को दो वर्षों में एक बार प्रीस्वायोपीया, ग्लौकोमा इत्यादि जैसी सामान्य समस्याओं की जांच करवाना आवश्यक है।
  • अपने टीकाकरण को अद्यतन करें- आपके लिए आवश्यक किसी नए टीका के बारे में अपने डॉक्टर से जानकारी लें।
  • वयस्कों के लिए टीका।
  • साधारणत: यह समझा जाता है कि बचपन में अनेक टीकाओं के बाद वयस्कों को और टीका की जरूरत नहीं है। तथापि, वयस्कों में भी टीका स्वास्थ्य समस्याओं से कई प्रकार बचाता है।
  • किसी को टीककरण की आवश्यकताओं को कई कारक प्रभावित करते हैं। शॉट प्राप्त करने से पहले, किसी को भी अपने चिकित्सक को अवगत कराना चाहिए कि क्या वे विदेश यात्रा करने की योजना बना रहे है, गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, मामूली या गंभीर रूप से बीमार हैं, गंभीर एलर्जी है या विगत टीके के साथ एलर्जी का इतिहास है, प्रतिरक्षण सिस्टम कमजोर हैं, हाल ही में एक और टीका लगवाया है या आधान किया है अथवा अगर उनको दौर पड़ने का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास है। ये व्यक्तिगत गुण और विशेषताएं उन आदर्श टीकों को निर्धारित करने में सहायता करती हैं जो आदर्श स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सबसे उपयुक्त है।
  • यौन गतिविधियों के आधार पर टीका की सिफारिश की जा सकती है। हैपाटाइटिस ए तथा बी लीवर में सूजन पैदा कर सकते हैं, टीकाकरण से बचाव हो सकता है।